Skip to main content

जापानियों की सफलता का रहस्य

 जापानियों की सफलता का रहस्य 

बीसवीं शताब्दी के मध्यावधि में परमाणु हमले से जिस जापान की रीढ़ पूरी तरह से टूट गयी थी, उसी जापान ने इतने कम समय में न सिर्फ खुद को मजबूत बनाया अपितु वह उगते हुए सूरज का देश भी बना | इतनी तरक्की और सफलता उन्हें उनके कुछ खास गुणों की वजह से मिली | आज सफलता के रहस्य में हम जापानियों के इन्हीं खास गुणों के बारे में जानेंगें |





1~ बेहद मेहनती :-

1945 में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले से जापान पूरी तरह से टूट गया था लेकिन बहुत कम समय में ही अपने मेहनत और लगन की बदौलत फिर से उगते हुए सूरज का देश बना | दरअसल जापान का हर व्यक्ति कर्म को पूरी निष्ठा से करने में विश्वास रखता है | यही वजह है कि जापान आज इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है |

2~ ईमानदारी :-

जब किसी व्यक्ति के चरित्र को परखना होता है तो सबसे पहले उसकी ईमानदारी परखी जाती है, और अगर किसी देश का एक व्यक्ति,  दो व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा का पूरा देश ही ईमानदारी की सच्ची मिशाल हो तो फिर उस देश को श्रेष्ठ होने से भला कौन रोक सकता है | जी हां जापान ऐसा ही एक देश है जहाँ का हर निवासी अपने कर्त्तव्य के प्रति 100% ईमानदार है |
जापानी अगर कोई सामान गिरा हुआ पाते हैं तो उसे या तो उस व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं जिसका है अथवा पुलिस को सौंप देते हैं ताकि पुलिस उस सामान को उसके मालिक तक पहुंचा सके | साथ ही ये अपने काम के प्रति भी बहुत ईमानदार होते हैं | यही ईमानदारी उन्हें औरों से बहुत आगे ले कर जाती है  |

3~  समय पाबंद :-

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी कार्य की सफलता बगैर समय की पाबंदी के संभव नहीं है | और समय का सही उपयोग,  प्रबंधन सीखना तो विश्व में जापान से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता है | जापान निवासी न केवल बेहद मेहनती और ईमानदार हैं बल्कि वे समय के भी बहुत पाबंद होते हैं | वे अपना कर प्रोजेक्ट समय पर ही पूरा करते हैं | जहां जाना भी होता है वहां समय पर ही पहुंचते हैं | जापान में समय से आना सभ्यता की निशानी समझा जाता है जबकि अपने भारत में जानबूझकर देर से आने में लोग अपना सम्मान समझते हैं |





4~ मिलनसार :-

जापान में किसी भी व्यक्ति का अभिवादन करते समय वहां के निवासी उसके सम्मान में अपने शरीर को आधे से ज्यादा झुका लेते हैं तथा गर्मजोशी के साथ उस व्यक्ति का स्वागत करते हैं |  उनमें घमण्ड या यूं कहें कि अकड़ लेश मात्र का भी नहीं होता है | वे हर किसी से दिल खोल कर मिलते हैं जिस प्रकार हम ईद व होली पर दिल खोल कर मिलते हैं |मिलनसार होना तथा विनम्रता उनकी सभ्यता व संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है |

5~ सेहतमंद :-

दुनिया में सबसे ज्यादा बुड्ढे लोग जापान मे निवास करते हैं |यह सब उनकी अच्छी सेहत के नाते ही संभव  हो पाया है | जापानी जितनी निष्ठा से अपना कर्म  करते हैं उतनी ही निष्ठा से वो अपने शरीर व सेहत का भी  ख्याल रखते हैं | कहते हैं ना कि  Health is wealth  ( स्वास्थ्य ही धन है ) , जापान की भी सफलता का अनमोल रहस्य उनका स्वस्थ होना भी है |


कठिन परिश्रम,  ईमानदारी,  समय पाबंदी, मिलनसारिता और बेहतर स्वास्थ्य जिस भी जगह पर एक साथ पाया जाए उस व्यक्ति अथवा देश को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता | जापान अपने इन्हीं पांच गुणों की बदौलत आज उगते हुए सूरज का देश है |

साथियों ईमानदारी से अपने दिल पर हाथ रख कर बताना कि अगर ये सारे गुण हर भारतीय अपना ले तो वह क्या - क्या कर सकता है और अपने देश को किस मुकाम तक ले जा सकता है.. अपनी राय कमेंट सेक्सन में जरूर दें और अगर आपको लगता है कि इस पोस्ट से आपकी जिंदगी में तनिक भी बदलाव हुआ तो अपने दोस्तों व परिचितों के साथ अवश्य शेयर करें ताकि वे भी इसे पढ़कर लाभ उठा सकें | और  ऐसे ही जीवन बदल देने वाले पोस्ट का नोटिफिकेशन पाने के लिए इस चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलिएगा |

धन्यवाद..

 



Comments

Popular posts from this blog

आत्मनिर्भर कैसे बने

आत्मनिर्भर कैसे बने :- हम सभी लोग बचपन से ही सुनते आए हैं कि आत्मनिर्भर बनो, अपने पैरों पर खड़े हो आदि | लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर आत्मनिर्भर बला क्या है और आत्मनिर्भर कैसे बना जाता है ? नहीं ना |  चलिए आज हम आप सभी को बताते हैं कि आत्मनिर्भर होना किसे कहते हैं और आत्म निर्भर कैसे बना जाए | आत्मनिर्भर व्यक्ति में कौन कौन से गुण होते हैं.  | आत्मनिर्भर कैसे बने आत्मनिर्भर दो शब्दों से मिलकर बना है आत्म व निर्भर | आत्म का अर्थ होता है खुद या स्वयं और निर्भर का अर्थ होता है आश्रित होना | इस प्रकार आत्मनिर्भर का अर्थ हुआ खुद पर निर्भर होना | अर्थात किसी  भी काम के लिए , किसी और पर आश्रित ना होना ही आत्मनिर्भर कहलाता है |स्वावलम्बन ,आत्मनिर्भर का दूसरा नाम है | आत्म निर्भर बनने के तरीके :- आत्म निर्भर बनने के बहुत से तरीके हैं किन्तु हम यहां उन्ही तरीकों के बारे में चर्चा करेंगे जो हमारे लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं | ये तरीके निम्नवत् हैं - 1-सेल्फ एक्टिविटी :- कोई भी काम खुद से करना ही सेल्फ एक्टिविटी कहलाता है | किसी भी व्यक्ति के लिए सेल्फ...

आलस्य दूर करने के अचूक उपाय

आलस्य दूर करने के 10 अचूक उपाय :- किसी भी मनुष्य को सफलता के शीर्ष पर पहुंचने या मंजिल की तरफ अपने कदम बढ़ाने में सबसे बड़े बाधक के रूप में जो पहला महत्वपूर्ण तत्व सामने आता है, वह है आलस्य | यही आलस्य हर असफलता का आधार है | आलस्य का मतलब हमारे मन व शरीर पर सुस्ती का हावी हो जाना है |  सुस्ती जिस हद तक हावी होती चली जाती है आलस्य उससे भी अधिक तेजी से अपना पैर जमाता चला जाता है जो हर प्रकार के रोग का जनक होता है | आलस्य के बारे में जानने के बाद हम सभी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह आलस्य होता क्यूँ है ? आलस्य के कारण क्या हैं ? आगे इसी सवाल का जवाब आगे दिया जा रहा है.-- आलस्य के कारण :- वैसे तो हमारे भीतर आलस्य पैदा होने के अनेको कारण हो सकते हैं लेकिन यहां सिर्फ मूल भूत कारणों पर चर्चा की जाएगी  जो निम्नवत हैं - 1- हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में नींद का ना मिल पाना |  2- अधिक भोजन करना भी आलस्य को जन्म देता है  3- भाग्यवादी नजरिया, आलस्य का ही रूप है | 4- व्यक्ति के जीवन में किसी लक्ष्य का न होना | 5- किसी कार्य को करने में ...

मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव : फायदा या नुकसान

 मुफ्त की आदत का हम पर प्रभाव  : फायदा या नुकसान कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती जी हां कोई भी वस्तु मुफ्त में नहीं मिलती | और अगर मिल रही है तो उसकी कीमत बड़ी महंगी होती है | कभी-कभी तो इसकी कीमत अपनी स्वतंत्रता देकर चुकानी पड़ती है | अगर आप भी किसी भी प्रकार की मुफ्त की चीजों के आदी हो गए हैं तो सावधान हो जाइए.. क्यों कि इसका प्रभाव बहुत भयानक है |  जो इंसान मुफ्त में कोई वस्तु लेता है तो वह देने वाले का एहसानमंद हो जाता है और एहसान के तले दबा व्यक्ति कभी भी निष्पक्ष व्यवहार नहीं कर सकता फिर चाहें देने वाला कितना ही अन्याय क्यों न करे | आज हम इस पोस्ट के माध्यम से यह जानेंगें कि आखिर मुफ्त में मिली वस्तु हमारे अमूल्य जीवन पर क्या प्रभाव डाल रही है और इसके फायदे तथा नुकसान क्या हैं. ? फायदा मुफ्त में मिलने वाली वस्तु को तमाम अध्ययन और इतिहास खंगालने तथा व्यवहारिक अनुभव के आधार पर फायदे और नुकसान के आधार पर देखें तो इसका फायदा बहुत कम है या फिर यूं कहें कि न के बराबर है लेकिन नुकसान बहुत है | फायदा देखने पर सिर्फ एक ही चीज समझ में आती है कि बिना मेहनत किए हमारी उस ...